Maharashtra State Board · HSC Commerce · Class 12 (Std XII)
Class 12 Hindi Chapter 13: कनुप्रिया
Kanupriya · Short notes, key concepts, quick revision and practice MCQs with answers
'कनुप्रिया' में राधा (कनु अर्थात कन्हैया की प्रिया) महाभारत युद्ध की पृष्ठभूमि में कृष्ण से प्रश्न करती है। उसके लिए प्रेम के तन्मय क्षण ही सार्थक हैं; युद्ध, कर्म, स्वधर्म, निर्णय और दायित्व जैसे शब्द उसे अर्थहीन लगते हैं। पाठ्यक्रम के चार अंश हैं: सेतु: मैं, अमंगल छाया, एक प्रश्न और शब्द: अर्थहीन।
Key concepts: कनुप्रिया
- कवि परिचय
- डॉ. धर्मवीर भारती (जन्म 25 दिसंबर 1926, इलाहाबाद; मृत्यु 4 सितंबर 1997): आचार्य धीरेंद्र वर्मा के निर्देशन में 'सिद्ध साहित्य' पर शोध; 'धर्मयुग' के संपादक; प्रयोगवादी कवि, कथाकार, समीक्षक; पद्मश्री, व्यास सम्मान।
- प्रमुख कृतियाँ
- उपन्यास: गुनाहों का देवता, सूरज का सातवाँ घोड़ा। कविता संग्रह: सात गीत वर्ष, ठंडा लोहा, कनुप्रिया। काव्य नाटक: अंधा युग, सृष्टि का आखिरी आदमी। एकांकी: नदी प्यासी थी। कहानी संग्रह: मुर्दों का गाँव, बंद गली का आखिरी मकान।
- काव्य प्रकार का प्रश्न
- कनुप्रिया न पूर्णतः महाकाव्य (नायिका प्रधान), न खंडकाव्य (हर गीत स्वतंत्र, राधा का मानसिक संघर्ष), न शुद्ध प्रगीत (गेयता का अभाव)। भारती ने स्वयं काव्य प्रकार नहीं बताया; इसमें भावों की एक धारा कड़ी के रूप में बहती है।
- सेतु: मैं
- इतिहास ने कनु को युद्ध का महानायक बनाया, पर वे राधा के सिर पर पैर रखकर शिखर पर चढ़ गए। क्या राधा लीलाभूमि और युद्धक्षेत्र के बीच केवल सेतु थी? क्या प्रेम साध्य नहीं, साधन था?
- अमंगल छाया
- उजड़े कुंज, रौंदी लताएँ, आकाश की धूल बताती है कि उस राह से कृष्ण की अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ युद्ध में जा रही हैं। कनु की प्रिय आम की डाल कटेगी क्योंकि वह रथों की गगनचुंबी ध्वजाओं में अटकती है।
- एक प्रश्न
- मान लो मेरे तन्मय क्षण केवल भावावेश थे और पाप-पुण्य, धर्माधर्म, न्याय-दंड, क्षमा-शील वाला युद्ध सत्य है; फिर भी मैं तुम्हारी बावरी मित्र हूँ। टूटे रथ, जर्जर पताकाएँ, गिद्ध: क्या ये सब सार्थक हैं? अर्जुन की तरह मुझे भी सार्थकता समझाओ।
- शब्द: अर्थहीन
- कर्म, स्वधर्म, निर्णय, दायित्व जैसे शब्द गली-गली सुनाई देते हैं, पर राधा के लिए अर्थहीन हैं। कनु के होंठों से वे रजनीगंधा के फूलों-से झरते हैं और राधा तक आते-आते 'राधन, राधन' बन जाते हैं; उनका अर्थ एक ही है: 'मैं, केवल मैं!'
Quick revision: important points
- कनुप्रिया = कनु (कन्हैया) की प्रिया = राधा।
- राधा की मूल प्रवृत्ति संशय या जिज्ञासा नहीं, भावोत्कट तन्मयता है।
- आम की डाल कटने का कारण: सेनापतियों के रथों की गगनचुंबी ध्वजाओं में अटकती है।
- राधा के मन में मोह का कारण: कनु का समझाना उसे बहुत अच्छा लगता है।
- अठारह अक्षौहिणी सेनाओं के कारण राधा को गर्व करना चाहिए, ऐसा उसका चेतन मन कहता है।
Practice MCQs with answers
'कनुप्रिया' का अर्थ है:
- कृष्ण की माता
- कनु (कन्हैया) की प्रिया राधा
- द्रौपदी
- यशोदा
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Answer: B. कनु (कन्हैया) की प्रिया राधा
कनु = कन्हैया।'कनुप्रिया' के रचनाकार हैं:
- डॉ. धर्मवीर भारती
- डॉ. जगदीश गुप्त
- त्रिलोचन
- महादेवी वर्मा
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Answer: A. डॉ. धर्मवीर भारती
विशेष अध्ययन की कृति।धर्मवीर भारती किस पत्रिका के संपादक रहे?
- सारिका
- धर्मयुग
- हंस
- नवनीत
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Answer: B. धर्मयुग
टाइम्स ऑफ इंडिया प्रकाशन, मुंबई।कनुप्रिया की पृष्ठभूमि है:
- रामायण
- महाभारत युद्ध
- स्वतंत्रता संग्राम
- प्रथम विश्वयुद्ध
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Answer: B. महाभारत युद्ध
राधा महाभारत युद्ध पर प्रश्न करती है।'सेतु: मैं' अंश में राधा स्वयं को क्या मानती है?
- लीलाभूमि और युद्धक्षेत्र के बीच का सेतु
- रानी
- सेनापति
- दासी
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Answer: A. लीलाभूमि और युद्धक्षेत्र के बीच का सेतु
क्या मैं केवल सेतु थी?
All Class 12 Hindi chapters
- Chapter 2: निराला भाई
- Chapter 4: आदर्श बदला
- Chapter 6: पाप के चार हथियार
- Chapter 8: सुनो किशोरी
- Chapter 10: ओजोन विघटन का संकट
- Chapter 11: कोखजाया
- Chapter 1: नवनिर्माण
- Chapter 3: सच हम नहीं; सच तुम नहीं
- गुरुबानी
- वृंद के दोहे
- Chapter 7: पेड़ होने का अर्थ
- Chapter 9: चुनिंदा शेर
- Chapter 12: लोकगीत (सुनु रे सखिया, कजरी)
- Chapter 13: कनुप्रिया
- Chapter 14: पल्लवन
- Chapter 15: फीचर लेखन
- Chapter 16: मैं उद्घोषक
- Chapter 17: ब्लॉग लेखन
- Chapter 18: प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
- अपठित गद्यांश और पारिभाषिक शब्दावली
- व्याकरण (रस, अलंकार, काल, मुहावरे, वाक्य शुद्धि)