Maharashtra State Board · HSC Commerce · Class 12 (Std XII)
Class 12 Hindi : व्याकरण (रस, अलंकार, काल, मुहावरे, वाक्य शुद्धि)
Vyakaran · Short notes, key concepts, quick revision and practice MCQs with answers
विभाग 5 (10 अंक) में पाँच प्रश्न 2-2 अंकों के होते हैं: काल परिवर्तन, अलंकार पहचान, रस पहचान, मुहावरों का अर्थ और वाक्य में प्रयोग, वाक्य शुद्धि। पहले विभागों की कृतियों में शब्द संपदा के रूप में लिंग, वचन, उपसर्ग, प्रत्यय, विलोम, समानार्थी भी पूछे जाते हैं। नियम याद करके नियमित अभ्यास से यह विभाग पूरे अंक दिलाता है।
Key concepts: व्याकरण (रस, अलंकार, काल, मुहावरे, वाक्य शुद्धि)
- रस और स्थायी भाव
- रस = काव्य की आत्मा; अंग: विभाव, अनुभाव, संचारी भाव, स्थायी भाव। शृंगार-रति, हास्य-हास, करुण-शोक, रौद्र-क्रोध, वीर-उत्साह, भयानक-भय, बीभत्स-जुगुप्सा (घृणा), अद्भुत-विस्मय, शांत-निर्वेद, वात्सल्य-ममत्व, भक्ति-भक्ति।
- बारहवीं के रस
- रौद्र (असह्य वचन/अपमान से क्रोध), बीभत्स (घृणास्पद वस्तुओं का वर्णन), अद्भुत (अलौकिक, आश्चर्यजनक), शृंगार (नायक-नायिका का प्रेम), शांत (वैराग्य, संसार की नश्वरता), भक्ति (ईश्वर के प्रति श्रद्धा)।
- अर्थालंकार
- रूपक: उपमेय पर उपमान का आरोप, दोनों अभिन्न (चरण-सरोज)। उपमा: उपमेय की उपमान से तुलना, वाचक सा/सम/सी/के समान (चरण-कमल-सम कोमल)। उत्प्रेक्षा: उपमेय में उपमान की संभावना, वाचक मानो/जनु/मनु/जानहुँ। अतिशयोक्ति: लोकसीमा से बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन। दृष्टांत: बात की पुष्टि के लिए उसी ढंग का उदाहरण।
- काल परिवर्तन
- वर्तमान (सामान्य: करता है; अपूर्ण: कर रहा है; पूर्ण: कर चुका है/किया है), भूत (सामान्य: किया; अपूर्ण: कर रहा था; पूर्ण: कर चुका था/किया था), भविष्य (सामान्य: करेगा)। कर्ता के लिंग-वचन के अनुसार क्रिया बदलती है।
- मुहावरे
- वह वाक्यांश जो सामान्य अर्थ छोड़कर विशेष अर्थ में प्रयुक्त होता है; लाक्षणिक-व्यंजनात्मक अर्थ ही स्वीकार होता है; वाक्य में प्रयोग होने पर ही सार्थक। बोर्ड में अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग करना होता है।
- वाक्य शुद्धि
- लिंग (संतान स्त्रीलिंग), वचन, कारक चिह्न (ने/को/से), क्रिया की सहमति, वर्तनी (परंतु, अतिथि, पराजय) और शब्द क्रम की अशुद्धियाँ सुधारना।
- वाक्य भेद
- रचना के आधार पर: सरल, संयुक्त (और, लेकिन, परंतु से जुड़े दो स्वतंत्र वाक्य), मिश्र (जो, जब, कि, जिससे आदि से आश्रित उपवाक्य)। अर्थ के आधार पर: विधानार्थक, निषेधार्थक, प्रश्नार्थक, आज्ञार्थक, विस्मयादिबोधक, संदेहसूचक, इच्छार्थक, संकेतार्थक।
Quick revision: important points
- उत्प्रेक्षा की पहचान: मानो, जनु, मनु, जानहुँ, मानहुँ।
- उपमा की पहचान: सा, सी, से, सम, सरिस, के समान।
- रूपक में योजक चिह्न से उपमेय-उपमान जुड़े होते हैं: चरण-सरोज, राम रतन धन।
- बीभत्स का स्थायी भाव जुगुप्सा (घृणा); शांत का निर्वेद; अद्भुत का विस्मय।
- मुहावरे का प्रयोग ऐसा हो कि वाक्य से उसका अर्थ स्पष्ट हो जाए।
Practice MCQs with answers
'चरण-सरोज पखारन लागा' में अलंकार है:
- उपमा
- रूपक
- उत्प्रेक्षा
- दृष्टांत
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Answer: B. रूपक
चरण पर सरोज का आरोप।'राधा-वदन चंद सो सुंदर' में अलंकार है:
- रूपक
- उपमा
- अतिशयोक्ति
- उत्प्रेक्षा
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Answer: B. उपमा
'सो' वाचक शब्द से तुलना।उत्प्रेक्षा अलंकार का वाचक शब्द है:
- सा
- मानो
- सम
- जैसे
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Answer: B. मानो
मानो, जनु, मनु।'हनुमंत की पूँछ में लग न पाई आग। लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग।।' में अलंकार:
- अतिशयोक्ति
- उपमा
- दृष्टांत
- रूपक
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Answer: A. अतिशयोक्ति
लोकसीमा से बढ़ा-चढ़ाकर वर्णन।'करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान। रसरी आवत जात है, सिल पर पड़त निसान।।' में अलंकार:
- दृष्टांत
- उत्प्रेक्षा
- रूपक
- अतिशयोक्ति
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Answer: A. दृष्टांत
बात की पुष्टि के लिए उदाहरण।
All Class 12 Hindi chapters
- Chapter 2: निराला भाई
- Chapter 4: आदर्श बदला
- Chapter 6: पाप के चार हथियार
- Chapter 8: सुनो किशोरी
- Chapter 10: ओजोन विघटन का संकट
- Chapter 11: कोखजाया
- Chapter 1: नवनिर्माण
- Chapter 3: सच हम नहीं; सच तुम नहीं
- गुरुबानी
- वृंद के दोहे
- Chapter 7: पेड़ होने का अर्थ
- Chapter 9: चुनिंदा शेर
- Chapter 12: लोकगीत (सुनु रे सखिया, कजरी)
- Chapter 13: कनुप्रिया
- Chapter 14: पल्लवन
- Chapter 15: फीचर लेखन
- Chapter 16: मैं उद्घोषक
- Chapter 17: ब्लॉग लेखन
- Chapter 18: प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीव
- अपठित गद्यांश और पारिभाषिक शब्दावली
- व्याकरण (रस, अलंकार, काल, मुहावरे, वाक्य शुद्धि)