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Maharashtra State Board · HSC Commerce · Class 12 (Std XII)

Class 12 Hindi : वृंद के दोहे

Vrind Ke Dohe · Short notes, key concepts, quick revision and practice MCQs with answers

रीतिकालीन कवि वृंद के नीतिपरक दोहे जीवन के व्यावहारिक सूत्र देते हैं: विद्या खर्च करने से बढ़ती है, अपनी पहुँच देखकर कार्य करो, व्यापार में कपट मत करो, ऊँचे स्थान से नहीं गुणों से बड़प्पन मिलता है, दुष्ट की संगति से बचो। हर दोहे में दृष्टांत बात को प्रभावी बना देता है।

Key concepts: वृंद के दोहे

कवि परिचय
वृंद (जन्म 1643 माना जाता है, मथुरा; मृत्यु 1723); पूरा नाम वृंदावनदास; रीतिकाल के रीतिबद्ध कवि; नीतिपरक दोहे प्रसिद्ध; ब्रज और अवधी शब्द; दृष्टांतों से बात प्रभावी।
प्रमुख कृतियाँ
वृंद सतसई, समेत शिखर छंद, भाव पंचाशिका, पवन पचीसी, हितोपदेश संधि, यमक सतसई, वचनिका, सत्यस्वरूप; 'बारहमासा' में बारह महीनों का वर्णन।
दोहा छंद
अर्धसम मात्रिक छंद; चार चरण; पहले और तीसरे चरण में 13-13, दूसरे और चौथे में 11-11 मात्राएँ; हर चरण के अंत में लघु।
विद्या धन
'सरसुति के भंडार की, बड़ी अपूरब बात। ज्यौं खरचै त्यौं-त्यौं बढ़ै, बिन खरचे घटि जात।।'
व्यवहार के सूत्र
चादर देखकर पाँव पसारो (तेते पाँव पसारिए, जेती लाँबी सौर); काठ की हाँड़ी दूसरी बार नहीं चढ़ती, इसलिए व्यापार में कपट नहीं; उद्यम मत छोड़ो।
गुणों का आदर
मंदिर के शिखर पर बैठकर कौआ गरुड़ नहीं बनता; कोयल आम लेती है, कौआ निबौरी; होनहार बिरवान के होत चीकने पात।

Quick revision: important points

Practice MCQs with answers

  1. वृंद का पूरा नाम है:

    1. वृंदावनदास
    2. वृंदाचरण
    3. वृंदलाल
    4. वृंदसिंह
    Show answer

    Answer: A. वृंदावनदास
    कवि परिचय।

  2. वृंद किस काल के कवि हैं?

    1. भक्तिकाल
    2. रीतिकाल
    3. आधुनिक काल
    4. आदिकाल
    Show answer

    Answer: B. रीतिकाल
    रीतिकालीन कवि।

  3. दोहे के पहले और तीसरे चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं?

    1. 11
    2. 13
    3. 16
    4. 24
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    Answer: B. 13
    13-13 मात्राएँ।

  4. सरस्वती के भंडार की अपूर्व बात क्या है?

    1. वह कभी खत्म नहीं होता
    2. खर्च करने पर बढ़ता है, न खर्च करने पर घटता है
    3. वह सोने से भरा है
    4. वह छिपा रहता है
    Show answer

    Answer: B. खर्च करने पर बढ़ता है, न खर्च करने पर घटता है
    पहला दोहा।

  5. 'तेते पाँव पसारिए, जेती लाँबी सौर' में 'सौर' का अर्थ है:

    1. सूरज
    2. चादर
    3. सेना
    4. शोर
    Show answer

    Answer: B. चादर
    सौर = चादर।

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